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कंगना रनौत के खून में है बागीपन, परदादा रहे स्वतंत्रता सैनानी, ऐसी है कंगना की कहानी

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। लेकिन इस बार कंगना की साधी टक्कर महाराष्ट्र की उद्धव सरकार से है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब कंगना ने किसी मुद्दे को लेकर बागी तेवर अपनाया हो, इससे पहले भी कंगना कई मुद्दों पर अपनी राय रख चुकी हैं। इन दिनों देश में चल रहे एक्टर सुशांत सिंह मौत मामले को लेकर भी कंगना ने तीखे तेवर अपनाए हैं और पिछले कुछ दिनों से एक्ट्रेस ड्रग्स तस्करी को लेकर बिना नाम लिए कई बॉलीवुड एक्टर्स समेत महाराष्ट्र सरकार पर लगातार निशाना साध रही हैं।

कंगना ने फिल्मों के जरिए तो काफी नाम कमाया है लेकिन उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी उनके जीवन पर खासा प्रभाव देखने को मिला है। कंगना हिमाचल प्रदेश के मांडी जिले की रहने वाली हैं। कंगना के पिता पेशे से एक बिजनसमैन हैं और उनकी मां एक स्कूल टीचर हैं। कंगना के साथ उनकी बहन रंगोली और भाई अक्षत का साथ हमेशा बना रहता है।

एक स्वतंत्रता सैनानी के परिवार से ताल्लुक रखने वाली कंगना रनौत बचपन से ही काफी जिद्दी और विद्रोही स्वभाव की रही हैं। कंगना के परदादा सरजू सिंह रनौत ने विधानसभा सदस्य रहने के साथ-साथ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी अपनी भागीदारी निभाई है। कंगना के परदादा ने शुरू से ही देश की अखंडता और संप्रभुता को बचाने में अपनी भागीदारी निभाई थी। उन्हीं के संस्कारों को ग्रहण कर कंगना के दादा भी भारतीय प्रशासनिक सेवा(इंडियन एडमिनिसट्रेटिव सर्विस) में शामिल हुए थे। कंगना बचपन से ही ऐसे माहौल में पली बढ़ी हैं जहां उन्हें हमेशा सच्चाई के लिए लड़ना सिखाया गया और एक मुखर स्वभाव वाले नेतृत्व बनने की सीख मिली।

कंगना बचपन से ही एक डॉक्टर बनना चाहती थीं। एक इंटरव्यू के दौरान कंगना ने बताया था कि जब वो अपना ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट दे रही थीं, तो एक विशेष परिवार से आने के कारण उनके लिए एक कोटा आरक्षित था लेकिन जब उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा तो उन्हें महसूस हुआ कि इस इंडस्ट्री में तो बिना किसी काबिलियत के भी स्टार किड्स के लिए तीस प्रतिशत सीटें आरक्षित है, और उन बच्चों की जगह कोई प्रतिभाशाली युवा भी नहीं ले सकता था।

अपने शुरूआती दिनों से ही एक कंगना काफी मुखर रही हैं वो उन महिलाओं में से हैं जिन्होंने हमेशा समाज के लिए अपने आवाज को बुलंद किया है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार ने कंगना पर जिस तरीके से हमला किया है उसके बाद से ही उद्धव सरकार को कटघड़े में खड़ा कर दिया गया है। अब देखना बाकी होगा की बॉलीवुड की मणिकर्णिका और महाराष्ट्र सरकार के बाच की लड़ाई का अंत कैसा होगा।

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