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जानिए…आखिर क्यों इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी 5 अगस्त की ये तारीख?

अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के भूमि पूजन की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। बस इंतजार है तो उस घड़ी का जब देश के प्रधानमंत्री अपने हाथों से मंदिर का शिलान्यास करेंगे। भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तिथि तय होने के बाद कारसेवक और रामभक्त कारसेवा का समय याद करते हुए फूले नहीं समा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन उनके लिए ऐसे सपने की तरह है जिसके पूरे होने की उम्मीद उन्हें उनके जीवन में नहीं थी। उन्हें लगता था कि वह मंदिर बनते हुए भी देख पाएंगे या नहीं। प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण का श्रेय वह संघ परिवार को देते हैं, जिसके अथक सहयोग से यह सपना साकार होने जा रहा है।

कारसेवा में अग्रणी भूमिका निभाने वाले विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्कालीन विभाग प्रमुख और बीजेपी के पूर्व महानगर अध्यक्ष पं. सुबोध गुबरेले(सदस्य झांसी विकास प्राधिकरण) का कहना है कि राम मंदिर निर्माण के जनजागरण के लिए उस समय ज्योति रथ यात्रा निकाली गई थी। इस रथ यात्रा का उन्हें जालौन जिले का प्रभारी बनाया गया था। वहां उन्होंने करीब सप्ताह भर तक पूरे जनपद में गांव-गांव में घूमकर लोगों को ज्योतिरथ यात्रा के दर्शन कराने का सौभाग्य प्राप्त किया था।

उन्होंने आगे बताया कि उस समय ज्योति रथ यात्रा की एक झलक पाने के लिए गांवों में लोगों का हुजूम उमड़ता था। लोग रात के 12 बजे तक एकत्र होकर टकटकी बांधे ज्योति रथ यात्रा के आने का इंतजार करते रहते थे। पूरे दिन में भारी मात्रा में फल व मिठाई ज्योति रथ पर एकत्रित हो जाती थी। जिसे वे प्रसाद के रूप में रामभक्तों को वितरित करते रहते थे। हर गांव में बच्चा-बच्चा राममय दिखाई देता था। वह जनआंदोलन जनता ने अपने हाथों में ले लिया था। जनता प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण के अत्यधिक उत्साहित होकर तन, मन व धन न्यौछावर करने का तैयार थी।

पं. सुबोध गुबरेले ने आगे कहा कि ज्योति रथ यात्रा में उमड़े जनसैलाब को देखकर तत्कालीन सपा सरकार के हाथ पांव फूलने लगे। इसका परिणाम यह हुआ कि जब जालौन जनपद के बाद रथ यात्रा ने झांसी जनपद में प्रवेश किया तो पहले ही दिन प्रशासन ने रथ यात्रा को रोक लिया। उसका नेतृत्व कर रहे सुबोध गुबरेले को उनके अन्य रामभक्तों समेत गिरफ्तार कर लिया। सभी को एहतियात के तौर पर झांसी जनपद से अलग जालौन जनपद के जिला कारागार उरई भेज दिया गया। यही नहीं मामूली बातचीत के दौरान रामभक्तों के उत्साह को तोड़ने के लिए उन पर लाठियां भी भांजी गई थी। इसमें कई रामभक्त चोटिल हुए थे। उन्होंने बताया कि उसके बाद कई रामभक्तों को झांसी से गिरफ्तार कर महोबा जेल भी भेजा गया था, जिसमें कई महिला रामभक्त भी शामिल थीं।

उस तत्कालीन परिदृश्य को याद करते हुए सुबोध गुबरेले की आंखें भर आई। उन्होंने कहा कि यह भी किसी सौभाग्य से कम नहीं कि राम मंदिर निर्माण का भूमि पूजन देश के यशस्वी प्रधानमंत्री और कारसेवा के अगुवा रहे नरेन्द्र भाई मोदी कर रहे हैं। उन्हें और उन जैसे लाखों करोड़ों रामभक्तों के लिए यह दिन किसी त्यौहार से कम नहीं है। 05 अगस्त 2020 की तिथि इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगी।

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