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जानिये उत्तर प्रदेश कौन कौन से आईपीएस को बताया जा रहा है भ्रष्ट,




नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वैभव कृष्ण के वायरल विडियो ने पुलिस महकमें में हलचल मचा दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले में रिपोर्ट तलब की है.

उत्तर प्रदेश के पुलिस प्रमुख (डीजीपी) ओपी सिंह ने आज प्रेस कॉफ्रेंस कर पूरे मामले पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच के लिए एडीजी मेरठ को 15 दिन का और वक्त दिया गया है.

उन्होंने कहा कि एसएसपी नोएडा से यह पूछा जाएगा कि उन्होंने गोपनीय दस्तावेज क्यों वायरल किए. ओपी सिंह ने कहा, ”विडियो क्लिप वायरल हुआ है. इस संबंध में एसएसपी नोएडा ने मुकदमा दर्ज कराया है. एसएसपी नोएडा ने गोपनीय दस्तावेज भेजे थे. जब हम लोगों को संज्ञान में आया तो निष्पक्षता के आधार पर केस हापुड़ ट्रांसफर कर दिया गया. एसपी हापुड़ इस मामले की जांच कर रहे हैं. आईजी मेरठ जोन इस मामले को नजदीकी से देखेंगे. एडीजी मेरठ से जांच करने को कहा गया है. एडीजी मेरठ ने जांच के लिए और समय मांगा है. हमने उन्हें 15 दिन का और समय दिया है.”

ओपी सिंह ने कहा कि एएससपी नोएडा से भी इस मामले में सफाई मांगी गई है कि आखिर गोपनीय पत्र सार्वजनिक क्यों हुए. डीजीपी ने कहा कि गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करना गैरकानूनी है. गोपनीय दस्तावेज के साथ ऑडियो क्लिप भी था, एसएसपी से हम पूछेंगे कि दस्तावेज को वायरल क्यों किए गए.

उल्लेखनीय है कि वैभव ने बुधवार को आरोप लगाया था कि उन्होंने पांच आईपीएस अफसरों के खिलाफ सीएम ऑफिस, डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को करीब एक महीना पहले गोपनीय जांच रिपोर्ट भेजी थी. तबसे एक बड़ी लॉबी उनके खिलाफ साजिश रच रही है और फेक विडियो इसी का हिस्सा है.

उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रमुख ओपी सिंह.

वहीं यह मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री कार्यालय, अपर मुख्य सचिव (गृह) और डीजीपी से गोपनीय रिपोर्ट पर जानकारी मांगी है.

एसएसपी वैभव कृष्ण के मुताबिक, उन्होंने एसएसपी (गाजियाबाद) सुधीर कुमार सिंह, एसपी (सुलतानपुर) हिमांशु कुमार, एसएसपी (एसटीएफ) राजीव नारायण मिश्र, एसपी (बांदा) गणेश साहा और एसपी (रामपुर) डॉ. अजय पाल शर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट भेजी थी.

एसएसपी ने साजिश के लिए इन्हीं अफसरों पर आरोप लगाए हैं.

नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण काफी तेज-तर्रार आईपीएस माने जाते हैं. नोएडा का चार्ज लेते ही उन्होंने अग्निशमन-होमगार्ड विभाग के बड़े अफसरों, पुलिस और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की थी. इसके अलावा उन्होंने पीसीआर पर तैनात प्राइवेट ड्राइवरों को हटाया था. क्योंकि इससे पुलिस की गोपनीयता भंग होने की आशंका थी.


इसके बाद सोशल मीडिया पर वैभव कृष्ण के तीन कथित आपत्तिजनक विडियो वायरल हुए. उन्होंने इसके खिलाफ नोएडा सेक्टर-20 थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है. उन्होंने इसकी आईजी मेरठ रेंज से इसकी जांच करवाने की मांग की है.




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