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देखिये शाहीन बाग का सुहाना सच

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां हर व्यक्ति को अपनी आवाज़ उठाने का पूरा अधिकार है। लेकिन विरोध करते-करते लोग हिंसा पर उतर आएं यह सरासर गलत है। हिंसा के लिए कानून में कोई जगह नहीं है। बता दें कि देश में जब से नागरिकता कानून पर चर्चा शुरू हुई है। तभी से ही देश के चारों कोनों में नागरिकता कानून (सीएए) का विरोध किया जा रहा है। धीरे-धीरे इस विरोध ने हिंसा का रुप ले लिया और कौन है इस विरोध के पीछे? आखिर कौन है जिसने मुस्लिम वर्ग के मन में इस प्रकार का ज़हर घोल दिया है कि उन्हें यह लगने लगा है नागरिकता कानून के तहत अब उन्हें भारत में नहीं रहने दिया जाएगा। उनसे उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी। लेकिन यह कानून नागरिकता छीनने का नहीं बल्कि नागरिकता देने वाला कानून है।

आपको बता दें कि दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में करीब एक महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शन चल रहा है। इस प्रदर्शन में बार-बार मीडिया के लोगों के साथ बदतमीजी की खबरें सामने आती रही हैं। लेकिन अब तो हद ही हो गई। मीडिया जगत के बड़े पत्रकारों में अपनी पहचान बनाने वाले दीपक चौरसिया इस प्रदर्शन को कवर करने के लिए शाहीन बाग गए हुए थे। जहां प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उनके ऊपर जानलेवा हमला किया। उनके कैमरामेन के साथ मारपीट की और उनका कैमरा भी तोड़ दिया। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर इस तरह का खुलेआम हमला लगातार वहां हो रहा है।

वहीं, दीपक चौरसिया ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि सुन रहे हैं कि संविधान ख़तरे में है, सुन रहे हैं कि लड़ाई प्रजातंत्र को बचाने की है! जब मैं शाहीन बाग की उसी आवाज़ को देश को दिखाने पहुंचा तो वहाँ मॉब लिंचिंग से कम कुछ नहीं मिला!

मामले को लेकर डीसीपी चिन्मय बिस्वाल का कहना है कि दीपक चौरसिया से मारपीट और कैमरे छीनने के आरोप में कुछ  आज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बताया की आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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