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प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने में जुटे सोनू सूद ने सरकार से की ये अपील

अभिनेता सोनू सूद इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वाहवाही लूट रहे हैं। सोनू सूद लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों को फ्री में उनके घर पर पहुंचाने का काम कर रहे हैं। सोनू सूद ने बताया कि उन्होंने मजदूरों को घर भेजने का फैसला आखिर कैसे लिया और फिर कैसे इसका इंतजाम किया। सोनू ने बताया कि मुझे मजदूरों के एक्सीडेंट्स से दुख हुआ था। मैंनें जब सुना कि इस जगह इतने मजदूरों की मौत हो गई और उस जगह उतने तो सोचा कि हमें इनके नाम पता होने चाहिए थे, इसकी मदद करनी चाहिए थी। तब मैंने अपनी दोस्त से बात करके उनकी हेल्प करने की कोशिश की। अलग-अलग राज्य की सरकारों से परमिशन ली और फिर लोगों को उनके घर भेजा।

सोनू ने आगे कहा कि मैंने पुलिस से बात की और वो भी मदद करना चाहते हैं। मैं मानता हूं कि किसी भी बात को ठान लो तो खुद से रास्ते खुल जाते हैं। हम उस दौर से गुजर रहे हैं जिसका कोई एक्सपीरियंस किसी को नहीं है। ऐसे में जरूरत है एक हाथ को दूसरे हाथ की। आप सब्जी वाले की मदद कर सकते हैं। हर किसी को किसी न किसी की जरूरत है और बहुत जरूरी है लोगों को वो मदद पहुंचाना।

सोनू सूद ने ये भी बताया कि वो नहीं चाहते थे कि मजदूरों के बच्चे बुरी यादें लेकर बड़े हों। वो बोले- मुझे पता था कि ये वो लोग हैं जिनका कोई हाथ नहीं थाम रहा। इन मजदूरों का सबसे विश्वास उठ चुका था। मैं नहीं चाहता था कि उनके छोटे-छोटे बच्चे अपने मां बाप को मुश्किलों से गुजरते हुए याद रखें। मैंने जिन लोगों की मदद की मैंने उनको जनता भी नहीं था, बस चाहता था कि वो अपने घर पहुंचे. इसमें पुलिस ने भी मेरी हेल्प की है।

सोशल मीडिया पर बहुत से लोग सोनू के इस नेक आम को पब्लिसिटी स्टंट बता रहे हैं। इसका जवाब देते हुए सोनू ने कहा कि मैंने अपने काम की जगह पर एक भी मीडिया के आदमी को नहीं आने दिया। मैंने 1000 लोग भेज दिए लेकिन मीडिया का एक भी बंदा नहीं अपने पास नहीं पहुंचने दिया। मुझे लगता है कि हर किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि आप क्या कर रहे हैं। बस जरूरत ये है कि लोग अपने घर ठीकठाक पहुंच जाएं। मेरी मां ने मुझे सिखाया था कि आप जरूरत में किसी के काम आ सकें तो आप सफल हैं। वरना कोई फायदा नहीं है।

सोनू सूद ने बताया कि वे अपनी दोस्त नीति गोयल के साथ मिलकर मजदूरों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने नीति के साथ मिलकर 10-12 लोगों की टीम बनाई है जो मजदूरों के नाम फाइल करते हैं। जिससे उनकी मदद की जा सके। सोनू इस समय दिन के 20-22 घंटों तक काम कर रहे हैं। वो सुबह 6 बजे लोगों को बसों में बैठकर खाना देकर उनके घर रवाना कर देते हैं। सोनू ने कहा- मजदूरों का फाइलिंग का प्रोसेस बहुत लंबा है। जब तक प्रोसेस पूरा होता है तब तक मजदूर पैदल ही घर को निकल जाता है। जब एक मजदूर निकलता है तो उनके लिए परमिशन पुलिस डिपार्टमेंट से लेनी होती है। मजदूर के मेडिकल को लेकर DCPऑफिस जाते हैं, फिर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और फिर और आगे जाते हैं। इसके बाद सब फाइनल होकर वापस आता है।

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