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मुस्लिम नेता का विवादित बयान, “अगर भारत के मुसलमानों ने अरब देशों से कर दी शिकायत उस दिन आ जाएगा जलजला”

हर कोई कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। लेकिन संकट की इस घड़ी में कुछ लोग अपने विवादित बयान देने से बाज नहीं आ रहे हैं। बता दें कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरूल इस्लाम एक बार फिर विवादों में घिरते दिख रहे हैं। जफरूल इस्लाम ने एक फेसबुक पोस्ट पर विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि जिस दिन भारत के मुसलमानों ने अरब देशों से अपने जुल्म की शिकायत कर दी जलजला आ जायेगा। उनके इस बयान पर बीजेपी सख्त हो गई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि जफरूल इस्लाम भारत की छवि खराब कर रहे हैं।

बीजेपी प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा है कि कुवैत के नाम दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन डॉ. जफरूल इस्लाम खान की एक चिट्ठी हैरान करने वाली है। हिंदुस्तान के मुसलमान जितने सुरक्षित और आजाद हैं, वो दुनिया के लिए मिसाल है। नफरत से भरी ऐसी चिट्ठी से देश की छवि बिगाड़ने की कोशिश अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री ने कहा कि यह लिखना गलत है, झूठ है। भारत की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री इस पर जबाव दें, तुंरत इस्लाम को उनको पद से हटाएं।

जफरूल इस्लाम ने पोस्ट में लिखा है कि भारतीय मुस्लिमों के साथ खड़े होने के लिए कुवैत का धन्यवाद। हिंदुत्व विचारधारा के लोग सोचते हैं कि कारोबारी हितों की वजह से अरब देश भारत के मुस्लिमों की सुरक्षा की चिंता नहीं करेंगे, लेकिन वो नहीं जानते हैं कि भारतीय मुस्लिमों के अरब और मुस्लिम देशों से कैसे रिश्ते हैं। जिस दिन मुसलमानों ने अरब देशों से अपने खिलाफ जुल्म की शिकायत कर दी, उस दिन जलजला आ जाएगा। यह पोस्ट 28 अप्रैल की रात को लिखी गई है। वहीं, मामले को लेकर विवाद बढ़ता देख जफरुल इस्लाम ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने किसी भी विदेशी देश या संस्था से भारत की शिकायत नहीं की है, न ही वे भविष्य में ऐसा करने की मंशा रखते हैं। जफरूल इस्लाम खान ने कहा है कि वे एक देशभक्त हैं और विदेशों में हमेशा से अपने देश के पक्ष में बोलते हैं।

बता दें कि जफरूल इस्लाम खान ने इससे पहले क्वारंटाइन सेंटर में तबलीगी जमात के लोगों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर दिल्ली सरकार को पत्र लिख चुके हैं। इस्लाम ने अपने पत्र में केंद्र और दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि तबलीगी जमात के लोगों को क्वारंटाइन की अवधि को पूरा करने के बाद छोड़ा नहीं जा रहा है। उनके साथ छुआछूत हो रही है। उन लोगों को कैदियों की तरह रखा जा रहा है। इस्लाम ने पत्र में कहा था कि एक तरफ सरकार ठीक हुए जमातियों का प्लाज्मा इस्तेमाल कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हें कैदियों से भी बदतर हालात में रखा जा रहा है।

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