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शाहीन बाग प्रदर्शन की वजह से टल सकता है दिल्ली का चुनाव, लग सकता है राष्ट्रपति शासन

दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन एक्ट और एनआरसी के खिलाफ करीब महीनेभर से प्रदर्शन  चल रहा है। शाहीन बाग का प्रदर्शन दिल्ली के विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। बीजेपी के नेताओं की ओर से चुनाव प्रचार में कई ऐसे बयान दिए गए हैं, जो विवाद का विषय बने हैं। खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक सभा में कहा है कि दिल्ली के चुनाव से तय होगा कि आप शाहीन बाग के साथ हैं या फिर भारत माता के नारों के साथ?

शाहीन बाग का प्रदर्शन शांत ना होता देख केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने का फैसला किया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपने एक ट्वीट में इस बात के संकेत दिए हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकार लोगों से बात करने के लिए तैयार है लेकिन एक व्यवस्थित तरीके से। केंद्रीय कानून मंत्री ने एक निजी चैनल से बात करते हुए कहा कि अगर आप विरोध कर रहे हैं तो अच्छी बात है…लेकिन आपके लोगों का जब हम कोई स्वर सुनते हैं वो कहते हैं कि CAA जबतक वापस नहीं होगा तब तक बात नहीं होगी। अगर ये चाहते हैं कि सरकार का कोई प्रतिनिधि बात करे तो एक स्ट्रक्चर तरीका होना चाहिए। अगर आप कहिएगा कि वहीं पर आकर बात करिए,  तो कैसे होगा?

गौरतलब है कि दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले करीब 50 दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहा है। यहां हजारों की संख्या में मुस्लिम महिलाएं नागरिकता संशोधन एक्ट, एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। इस विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली-नोएडा के रास्ते में रुकावट पैदा हो रही है। शाहीन बाग में बैठे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मोदी सरकार के द्वारा लाया गया CAA कानून संविधान के खिलाफ है। ये कानून अल्पसंख्यकों के खिलाफ है जो भारत के मूल नियमों का उल्लंघन करता है।

दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर देश के कई हिस्सों में इस प्रकार का प्रदर्शन हो रहा है, लखनऊ से लेकर मुंबई, बेंगलुरू से लेकर कोलकाता तक में बीते दिनों में हजारों की संख्या में मुस्लिम महिलाएं इस कानून के खिलाफ आवाज़ उठा रही हैं। बता दें कि बीते गुरुवार इस बात के संकेत मिल रहे थे कि शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी बंद पड़े एक रास्ते को खोल सकते हैं, ताकि लोगों को नुकसान ना हो। लेकिन जब देर रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने वाली थी, तो प्रदर्शनकारियों के बीच असहमति के सुर दिखाई पड़े और फिर इस तरह का फैसला रद्द हो गया।

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