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Arogya setu ऐप में कमी निकालने पर मिलेगा 1 लाख रुपए का ईनाम

देश में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए डिवेलप किए गए आरोग्य सेतु ऐप के लिए सरकार एक बग बाउंटी प्रोग्राम लेकर आई है। NIC की ओर से कोविड-19 कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप आरोग्य सेतु का सोर्स कोड भी रिलीज कर दिया गया है, जिसकी मदद से ऐप में कमियों और खामियों का पता लगाया जा सके। दरअसल, आरोग्य सेतु ऐप के सुरक्षित होने पर कई एक्सपर्ट्स की ओर से सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। सरकार बग्स, कमियों और बेहतर कोड बताने वालों को कैश रिवॉर्ड भी देगी।

सरकार की ओर से आरोग्य सेतु ऐप के ऐंड्रॉयड वर्जन का सोर्स कोड शेयर किया गया है और कहा गया है कि करीब 98 प्रतिशत यूजर्स ऐंड्रॉयड ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, बहुत जल्द आरोग्य सेतु के iOS और KaiOS वर्जन का सोर्स कोड भी शेयर कर दिया जाएगा। GitHub पर इस ऐप के ऐंड्रॉयड वर्जन का सोर्स कोड लाइव है और नैशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) की ओर से एक बग-बाउंटी प्रोग्राम भी अनाउंस किया गया है, जिसमें इस कोड की मदद से रिसर्चर्स ऐप को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। रिसर्चर्स की ओर से इस कदम का स्वागत किया गया है। भारतीय टेक फर्म The Dialogue ने कहा कि ऐसा करने से ना सिर्फ ऐप पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा बल्कि बेहतर फीडबैक भी इसे लेकर दिया जा सकेगा।

नीति आयोग की टीम की ओर से कहा गया है कि iOS वर्जन का सोर्स कोड भी अगले दो सप्ताह में रिलीज कर दिया जाएगा। नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत की ओर से कहा गया कि आरोग्य सेतु ऐप की ओपन-सोर्सिंग करना अपने आप में खास है क्योंकि किसी दूसरे गवर्मेंट प्रॉडक्ट को दुनियाभर में कहीं भी इतने बड़े स्केल पर ओपन सोर्स नहीं किया गया है। आरोग्य सेतु के सभी प्लैटफॉर्म्स पर कुल मिलाकर अब तक 11.5 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि ऐप ने 1,40,000 से ज्यादा यूजर्स को कोरोना वायरस से रिस्क ले अलर्ट किया है।

बग बाउंटी प्रोग्राम की शुरुआत भी इस ऐप को बेहतर बनाने के लिए की गई है और ऐप में कोई सुरक्षा से जुड़ी खामी का पता लगाने पर कुल तीन लाख रुपए तक के कैश रिवॉर्ड दिए जाएंगे। इसके अलावा क्वालीफाई करने वाले सभी सबमिशंस को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा और बग या सिक्यॉरिटी रिस्क के आधार पर अवॉर्ड दिए जाएंगे। इन प्रोग्राम में केवल भारत के रिसर्चर्स हिस्सा ले पाएंगे, भारत से बाहर के रिसर्चर्स अगर सबमिशन भेजते हैं तो उन्हें सर्टिफिकेट मिलेगा लेकिन उन्हें रिवॉर्ड नहीं मिलेगा। 27 मई से शुरू किया गया यह प्रोग्राम 26 जून तक चलेगा।

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