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LOCKDOWN: केजरीवाल सरकार के दावों की खुली पोल, गरीब प्रवासी मजदूरों ने बयां किया अपना दर्द

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए पीएम मोदी ने देश में लॉकडाउन लगाया है। जिससे प्रवासी मजदूरों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। उनके पास ना तो रोजगार है, ना खाना और ना ही रहने के लिए घर है। मजदूर देश के अलग-अलग हिस्सों में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। ऐसी ही कुछ तस्वीरें देश की राजधानी दिल्ली से सामने आई हैं। यहां यमुना नदी के किनारे पुल के नीचे सैंकड़ो मजदूर रहने को मजबूर हैं।

यमुना नदी के पास पिछले कई दिनों से हजारों की संख्या में लोग रह रहे हैं। सरकार दावा कर रही है कि लोगों को शेल्टर होम में रखा जा रहा है, खाने का पूरा इंतजाम है, जरूरत की चीजें मुहैया कराई जा रही हैं, लेकिन यहां की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। 11 अप्रैल को इनके लिए बनाए गए शेल्टर में कुछ शरारती तत्वों ने आग लगा दी। इसके बाद इन लोगों के सामने कोई विकल्प नहीं था।

वहीं,  दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यमुना घाट पर जुटे मजदूरों को तुरंत शिफ्ट कर दिया गया है। उनके रहने खाने की व्यवस्था भी सरकार की तरफ से कर दी गई है। किसी के लिए भी यहां पर रहने और खाने की कोई कमी नहीं है। कहीं भी कोई भूखा या बेघर मिले तो हमें जरूर बताएं।  सरकार के दावों से उलट लोगों का कहना है कि पहले प्रशासन की तरफ से खाने का इंतजाम किया जा रहा था, लेकिन अब एक टाइम का ही खाना मिल रहा है, वो भी गुरुद्वारे के लोग दे जाते हैं। हाल ही में कश्मीरी गेट के पास शेल्टर होम में आग लग जाने के बाद वहां रहने वाले लोग यमुना किनारे आ बसे हैं।

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