india

NRC को लेकर हुआ चौंकाने वाला खुलासा, जानकर उड़ जाएंगे होश

देश के कई इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स उन सभी भारतीय नागरिकों का एक रजिस्टर है जिनकी रचना नागरिकता अधिनियम, 1955 के 2003 के संशोधन द्वारा अनिवार्य है। इसका उद्देश्य भारत के सभी कानूनी नागरिकों का दस्तावेज बनाना है ताकि अवैध प्रवासियों की पहचान की जा सके और 2013-2014 में शुरू होने वाले असम राज्य के लिए लागू किया गया है। भारत सरकार की योजना 2021 में देश के बाकी हिस्सों में इसे लागू करने की है।

असम में एनआरसी लिस्ट से बाहर हो चुके 19 लाख लोगों को तगड़ा झटका लगा है। असम के एक गैर सरकारी संगठन असम पब्लिक वर्क्स ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के पूर्व राज्य संयोजक प्रतीक हजेला पर दो लोगों के नाम हटा कर पंजी के अंतिम स्वरूप में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। प्रदेश सीआईडी को दी गयी शिकायत में एपीडब्ल्यू ने आरोप लगाया कि हजेला ने दो लोगों को सूची से निकाल कर लोक रिकार्ड के साथ छेड़छाड़ की है। एनआरसी मामले में यही संगठन उच्चतम न्यायालय में मूल याचिकाकर्ता है।

एपीडब्ल्यू के अध्यक्ष अभिजीत शर्मा ने आरोप लगाया कि हजेला ने अपनी ताकत एवं पद का दुरूपयोग करते हुए उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया, फर्जी दस्तावेज बनाया, सरकारी पंजी के साथ फर्जीवाड़ा किया और साइबर अपराध को अंजाम दिया है। राष्ट्रीय नागरिक पंजी असम में वास्तविक भारतीय नागरिकों की पंजी का दस्तावेज है और उच्चतम न्यायालय की निगरानी में इसको अद्यतन किया गया था । इसकी अंतिम सूची का प्रकाशन पिछले साल 31 अगस्त को किया गया था, जिससे 19 लाख लोग बाहर हो गये ।

वहीं, कई राजनीतिक दलों एवं संगठनों ने आरोप लगाया कि कई अवैध प्रवासियों के नाम इस सूची में शामिल हैं जबकि बड़ी तादाद में वास्तविक भारतीय के नाम इससे बाहर हैं । शर्मा का कहना है कि असम के स्थानीय जिम्मेदार संगठन होने के नाते हमने कुछ निश्चित आंकड़ों के बारे में जानकारी ली और दो लोगों के नाम शामिल करने की धोखाधड़ी के बारे में पता चला, जिन्हें पहले विदेशी घोषित कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस मुद्दे पर मीडिया में खबरें आयीं तो हजेला ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी की अंतिम सूची के साथ छेड़छाड़ किया और अपने ताकत का दुरूपयोग करते हुए वेवसाइट तक पहुंच बनाई। उन्होंने उन दो लोगों का दर्जा स्वीकृत से बदलकर खारिज कर उच्चतम न्यायालय का अनादर किया है। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 13 अगस्त को राष्ट्रीय नागरिक पंजी के अंतिम प्रकाशन से पहले हजेला को एक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया था ताकि इसके प्रकाशन के बाद इसमें किसी अवैध गतिविधि को रोका जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *