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WHO ने Lockdown में ढील को लेकर दी कड़ी चेतावनी

चीन के वूहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस ने दुनिया के कई देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। अब भारत भी इससे बुरी तरह प्रभावित है। देश में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने लॉकडाउन लागू किया है। साथ ही कुछ रियायतें भी दी गई हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इसे लेकर अपनी चिंता साफ-साफ जाहिर कर दी है। उनका कहना है कि नियमों में ढील मिलते ही लोगों का जमावड़ा एकदम से बाहर निकलेगा और दूसरे लोगों के साथ संपर्क में आएगा।

जानकारी के मुताबिक, लॉकडाउन के नियमों में छूट को लेकर वैज्ञानिकों के दिमाग में दो तरह की स्थितियां पैदा हो रही हैं। पहली, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन कर लोग सामान्य से ज्यादा आपसी मेल-जोल बढ़ा लेंगे। दूसरा, कुछ लोग महामारी से घबराकर सोशल लाइफ से दूरी बनाए रखेंगे। WHO भी कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में लोगों की थकान को गंभीरता से देख रहा है। यूरोप में WHO की टेक्निकल ऑफिसर कैथरीन हैबरसाट ने कहा कि, ‘देश में लॉकडाउन के संशोधनों को लागू करते वक्त सरकारों को जरूरत थी कि वे लोगों के मन को समझें।’

हैबरसाट का कहना है कि ‘एक तरफ हम इस बात से परेशान हैं कि नियमों में छूट के बाद लोग अपनी सोशल लाइफ में वापस लौट जाएंगे। इस बीच लोगों से उनका संपर्क पहले से कहीं गुना ज्यादा बढ़ भी सकता है।’ लोगों के ज्यादा मिलने जुलने से कोरोना के संक्रमण का खतरा और भी ज्यादा बढ़ेगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग इसे लेकर अब भी पहले की तरह ही चिंतित रहेंगे। यहां तक कि वे उन लोगों से भी नहीं मिल सकते जिनके सोशल सपोर्ट की उन्हें बेहद जरूरत होती है। वे ना तो डॉक्टर के पास वैक्सीनेशन के लिए जाते हैं और ना ही लोगों के संपर्क में आते हैं।’

हैबरसाट ने बताया कि इस वक्त पूरी दुनिया में लॉकडाउन से जुड़ी समस्याओं के मामले सामने आ रहे हैं। ये सभी मामले आपकी मेंटल हेल्थ, स्वास्थ्य, आइसोलेशन, क्वारंटीन और सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े हैं। साथ ही यह आपकी सामाजिक गतिविधियों, आर्थिक स्थिति, संस्कृति या सामाजिक दबाव से भी जुड़ा हो सकता है।

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